Kavita Meri Gawaar Kirayedarni

Kavita Meri Gawaar Kirayedarni: देसी कहानी के सभी रीडर्स को मेरा ही नमस्ते और आंटीयो ओर भाभियो की चूत मे प्यारा सा किस. मैं आपका कामदेव आशीष आप सबके लिए अपना एक ओर न्यू सेक्स अड्वेंचर लाया हू उम्मीद करता हू की आप सबको मेरी कहानी पसंद आएगी.

दोस्तो मेरे घर मे जुलाइ मे एक फॅमिली किराए का घर देखने के लिया आई, उस फॅमिली मे सिर्फ़ 3 लोग थे, हज़्बेंड वाइफ ओर उनका 6 साल का बेटा मैं बाकी किसी का तो नाम न्ही बता सकता.

लेकिन वाइफ का नाम बताता हू वाइफ का नाम था कविता जो की अनपढ़ गवार है लेकिन साली वॉट’स अप बढ़िया चला लेती थी पता न्ही कैसे.

मैने कविता को वॉट’स अप के थ्रू ही पटाया ओर चोद डाला.

मैं उसे कविता भाभी बोलता था वो दिखने मे ठीक ही थी ना ज़्यादा गोरी ना ज़्यादा सावली बूब्स का साइज़ भी एवरेज था. लेकिन मेक अप करने के बाद और रेड सारी और गहने पहनने के बाद कमाल की माल दिखती थी आवाज़ बहुत ही सॉफ्ट और प्यारी थी.

कविता की बस एक बात पसंद न्ही आई की वो अपनी टाँगो के बाल सॉफ न्ही करती थी, ना ही उसने चूत के बाल सॉफ किए थे. लेकिन मुझे तो सिर्फ़ उसकी टाँगों के बीच वाले छेड़ यानी की चूत से मतलब था, उन लोगो के घर मे आ कर रहना स्टार्ट किया. उन लोगो को हमारे यहा रहते हुए अभी ऑलमोस्ट तीन ही महीने हुए थे.

कविता भले ही अनपढ़ ओर गवार थी लेकिन पति व्रता टाइप औरत थी . वो पूजा पाठ मे बहुत मानती थी. खैर मेरे को तो उसे कैसे भी करके चोदना था. तो मैने उसे वॉट’स अप पे बात करनी स्टार्ट की मैं जानता था की वो पूजा पाठ वाली औरत है, तो मैं उसे वैसे टाइप के फोटोस ओर वीडियोस सेंड करता था.

उसको पसंद भी आते थे वॉट’स अप पे स्टेटस भी सेंड करता था, उसकी तरफ से भी स्टेटस आते थे. मेरे पास वो मॅग्ज़िमम टाइम अपनी ही सेल्फी क्लिक करके सेंड करती थी अलग अलग पोज़ मे अलग फेस एक्सप्रेशन्स के साथ.

हम दोनो की अच्छी बनने लग गई थी, कविता का हज़्बेंड सेक्यूरिटी गार्ड की जॉब करता था, तो उसको कभी डे शिफ्ट या फिर नाइट शिफ्ट मे ड्यूटी करनी पड़ती थी. तो भैया ड्यूटी के बाद घर आ कर बस सो जाते थे, तो भाभी को अपने हज़्बेंड के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने को न्ही मिल पता था.

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मुझे इसका भी बेनेफिट मिला मैने फिर भाभी से करीबी बढ़ानी स्टार्ट की, भैया के ड्यूटी जाने के बाद मैं ऐसे ही मिलने चला जाता था चाय नाश्ते का बहाना बना कर . उनके अकेलेपन मे साथ देने के लिए. उनको मेरा आना कभी न्ही खटका बल्कि वो मेरा आना पसंद करती थी, मैं उनको खूब हसाता था उनकी मस्ती लेता था खीचाई करता था.

भाभी बहुत खुश हो जाती थी, ऐसे ही एक दिन मैं उनके पास गया तो वो बस बाथरूम से नहा कर बाहर निकली ही थी क्योकि पढ़ी लिखी न्ही थी ओर उनमे गाव का रहन सहन वाली आदत थी, तो पेटिकोट बाँध कर कमरे मे मेरे सामने आ गई.

मैं तो बस एकटक अपनी नज़रे बिना हटाए उनके गोरे बदन को देखता ही जा रहा था, उनकी बूब्स की लाइन भी अच्छे से दिख रही थी.

उनकी बालों वाली टाँगें भी बहुत सेक्सी लग रही थी, पेटिकोट उनके घुटनो से थोड़ा उपर था भाभी मुझे खुद को ऐसे घूरता हुआ पा कर बहुत बुरी तरह शर्मा गई और झट से बेड पे पड़ी अपनी साड़ी उठा कर खुद को कवर कर लिया, और बोली की मैं वाहा कब आया.

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मैं बोला की आप जैसे ही बाथरूम से बाहर आए, मैं भी उसी टाइम आया मुझे पता न्ही था की आप नहा रही होंगी,

अपने रूम मे आप सिर्फ़ पेटिकोट पहन कर बाथरूम से बाहर आ जाती हो ,मेरे मूह से, ये बात सुनने के बाद वो शर्मा गई और अपना सिर नीचे झुका लिया.

फिर मैं बोला की भाभी प्लीज़ बुरा मत फील करना पर आप बहुत ही खूबसूरत और कमसिन हो.

आप लोग जब से हमारे घर रहने आए हो, तभी से मुझे आप अच्छी लग गई थी और हम दोनो ही ये अच्छे से जानते हैं की भैया आपको अच्छे से टाइम न्ही दे पाते ड्यूटी से थक कर आते हैं और बिना कुछ किये ही सो जाते हैं.

भाभी बोली की आप ये सब क्या बोल रहे हैं, तो मैं बोला भाभी आप इतनी भी भोली मत बनो आप को सब समझ आ रहा है की मैं क्या बोल रहा हू और भैया आपके साथ क्या न्ही करते.

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मैं फिर भाभी के करीब गया और उनकी साड़ी खीच कर गिरा दी, भाभी अब मेरे सामने सिर्फ़ पेटिकोट मे थी, उनको भी तो सेक्स की ज़रूरत थी, तो वो मुझे बोली की ये सब ग़लत है मैं आपके साथ ऐसा न्ही कर सकती.

तो मैं बोला की भाभी कुछ ग़लत न्ही है आप एक औरत हो और मैं एक जवान लड़का हू आपको जिस चीज़ की ज़रूरत है, मैं आपको वो दे सकता हू तो प्लीज़ ज़्यादा मत सोचो और जो हो रहा है उसे होने दो.

ऐसा कह के मैने भाभी को बेड पे लेटा दिया . उनका पेटिकोट खोल कर उन्हे नंगी कर दिया.

मैं फिर उनके उपर चढ़ गया और उनके घुटने मोड़ कर टाँगें फैला दी और उनकी चूत मे उंगली करने लगा, उनको लिप्स पे किस करने लगा. वो भी गरम हो गई और मेरा पूरा साथ देने लगी.

उन्होने फिर अपना हाथ मेरे लंड पे रखा और पेंट के उपर से लंड सहलाने लगी, मैं उठा और अपनी पेंट उतार डाली. मैने अंडरवेयर न्ही पहनी थी, तो मैं भी पूरा नंगा उनके उपर लेट गया और अपना खड़ा मोटा लंड उनकी चूत पे रगड़ने लगा.

फिर एक दम से लंड रगड़ते हुए भाभी की चूत मे अंदर घुसा दिया और उनको खुद से पूरी तरह चिपका कर चोदने लगा.

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मैने स्टार्टिंग ही ज़ोरदार झटकों से की थी, भाभी का बदन ज़ोर ज़ोर से हिल रहा था ,शेक हो रहा था वो ज़ोर से आहें भर रही थी मोन कर रही थी आआहह आआहह, मैं बहुत ज़ोर के झटके मार रहा था.

10 मिनिट तक चोदने के बाद मैं उठा और भाभी की चूत को चाटना शुरू किया, उनकी चूत को पूरा खोल कर दो उंगली अंदर घुसा कर फिंगरिंग करने लगा, उनके चूत के दाने यानी क्लाइटॉरिस को होँठो से चूसने लगा.

खीचने लगा जीभ अंदर घुसा कर लीक किया वो बहुत तिलमिला रही थी तड़प रही थी. ऐसा लगा रहा था की कभी भी अपना पानी निकाल देगी.

तो मैने और स्पीड से फिंगरिंग की और देखते ही देखते भाभी ने पानी मेरे मूह पे फेक दिया और ज़ोर से चिल्ला कर शांत पड़ गई

मैं उठा और भाभी के बगल मे लेट गया और उनको अपना लंड चूसने को बोला. तो वो बोली की उसने आज तक अपने पति का लंड न्ही चूसा है. तो मैं बोला की जो आज तक न्ही किया वो आज करलो अरे चूस के तो देखो क्या मज़ा आएगा.

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भाभी क्या कभी भैया ने आपकी चूत छूसी है क्या जैसे मैने छूसी. वो बोली की न्ही वो तो बस चुदाई ही करते है.

वो भी 10 मिनिट मे झड़ जाते है मुझे अच्छे से कभी न्ही चोदा, आज तक तुम्हारी जैसी चुदाई उन्होने ने भी न्ही की ठीक है मैं लंड चुसती हू.

ऐसे बोल कर उसने मेरा खड़ा लंड हाथ मे लिया और सूपड़े के उपर से चूसना चालू किया, वो वैसे उतना अच्छे से न्ही चूस पा रही थी. तो मैने उसका सिर पकड़ा और लंड को उसके गले तक अंदर डाल दिया और कमर से झटके मार कर लंड चुसवाने लगा.

उसकी साँस बीच बीच मे रुक जारही थी, तो वो अपना मूह लंड से हटा कर साँस लेती फिर वापस चूसने लग जाती. मैने 10 मिनिट तक अपना लंड चुस्वाया, फिर उसको अपनी गांड मेरे मूह की तरफ करने बोला तो वो घुटने के बल अपनी गांड मेरी तरफ करके डॉगी पोज़िशन मे आ गई.

मैने फिर लंड उसकी चूत मे पीछे से लंड डाला . धक्का धक अपना लंड कविता की चूत मे अंदर बाहर पेलने लगा, वो चीखने लगी चिल्लाने लगी.

मैने उसका मूह बिस्तर पे दबा दिया ताकि उसकी आवाज़ ज़्यादा बाहर ना निकले और ज़ोर दार झटके मारने लगा, धक्का धक ज़ोर ज़ोर से चुदाई करने लगा.

मेरा भी अब कभी भी पानी निकल सकता था. तो मैने कविता को बोला की पानी अंदर ही डाल दू क्या. तो वो बोली की हाँ निकाल दो मेरी माहवारी (पीरियड) ख़तम हो चुका है.

मैने धक्कों की स्पीड तेज़ की और अपना सारा पानी कविता की चूत मे अंदर तक डाल दिया

हम दोनो इस ज़बरदस्त चुदाई से बुरी तरह थक कर बिस्तर मे अगल बगल लेट गये और मैं कविता के बूब्स मसलने लगा.

कविता बोली की अब मैं तुम्हारी हू जब मन करे आ जाना और मुझे चोद जाना, मैने फिर कपड़े पहने और निकल गया क्यूकी कविता के बेटे का स्कूल से आने का टाइम हो गया था.

ठीक है दोस्तो ये थी मेरी सेक्स स्टोरी कविता भाभी के साथ, मेल करके बताना की कैसी लगी?

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