College Time Ke Wo Sunehre Din

College Time Ke Wo Sunehre Din: हेल्लो,फ्रेंड्स मैं कृति 26 साल की हाउसवाइफ. गुजरात से. मास्टर डिग्री करने मैं दूसरे सिटी मे स्टडी करने के लिए गयी. और वाहा एक दिन मेरे फेसबुक अकाउंट पे एक टेक्स्ट आया, जिसमे एक फोटोग्रॅफ था जिसमे मैं मेरे बी.एफ अरुण के साथ पार्क मे बैठी हुई थी, एक दूसरे से काफ़ी नज़दीक एक हाथ मेरे कंधे पे था ऐसी तस्वीर थी.

और वो टेक्स्ट भेजने वाला मेरे सिटी मे मेरे घर के पास मे ही शॉप थी, उसका बेटा था सलीम. मैं चॉक गयी और साथ मे मोबाइल नंबर था उसका एडरेस्स लिखा था और कॉल मी बेबी भी लिखा था.

मैं घबरा गयी और उसको कॉल किया – हे सलीम मैं कृति.

सलीम – तुम्हारे कॉल का ही इंतज़ार कर रहा था बेबी.

मैं – ये सब क्या है?

सलीम – तुम्हारी पिक है तुम्हारे यार के साथ अब ये सोचो ये तुम्हारे घर वालो को मिल जाए तो?

मैं – नही नही प्लीज़ ऐसा कुछ मत करना.

सलीम – कल कितने बजे फ्री हो?

मैं – शाम 5 बजे से फ्री हू आफ्टर कॉलेज.

सलीम – और कितने बजे तक?

मैं – 8 बजे तक, क्यू?

सलीम – अड्रेस सेंड करता हू वाहा आ जाना ठीक 5:30 बजे.

मैं – क्यू?

सलीम – अब क्या है तुम्हारी खूबसूरती का थोड़ा सा लाभ मैं भी तो लू.

मैं – नही प्लीज़ ऐसा मत करो.

सलीम – मैं 5:30 बजे तुम्हारा इंतजार करूँगा और 8 बजे चली जाना. अब आना नही आना तुम्हारी मर्ज़ी.

और कॉल काट गया और उसके तुरंत बाद एक मेसेज आया जिसमे फ्लॅट का अड्रेस था. मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था.

बहुत देर सोचने के बाद मेने मन को मना लिया और उसे मेसेज किया “ठीक है मैं कल आ जाउंगी, पर वो फोटो डिलीट करना होगा और ये फर्स्ट आंड लास्ट टाइम, उसके बाद तुम अपने रास्ते मे अपने रास्ते.”

रिप्लाइ मे “ओके बेबी. इट्स वेरी एंजायबल 2 अवर्स फॉर यू.”

मैं दूसरे दिन कॉलेज से वाहा गयी, जीन्स और टॉप पहने हुए. मेरा फिगर साइज़ उस टाइम 32-28-34 था.

डोर ओपन हुआ तो सलीम ने मुझे उपर से नीचे तक घूर के देखा, एक अजीब सी स्माइल के साथ और कहा “सच मे आज तो मज़ा आ जाएगा” और कहा “अंदर रूम मे जाओ मैं आता हू.”

वही हॉल मे दूसरे 2 लड़के भी बैठे थे. मुझे काफ़ी शरम आ रही थी और मैं तुरंत ही अंदर की ओर जाने लगी. तभी एक की आवाज़ आई “ओ सलीम क्या माल है यार. जन्नत की सैर करेगा तू आज.”

सलीम – एक साल से नज़र मे थी वाहा मौका ना मिला पर यहा आ गई हाथ मे.

मैं अंदर के रूम मे गयी, तो एक बेड था डबल साइज़ का. अभी मैं खड़ी ही थी की सलीम ने आके डोर बंद किया और मुझे जक्कड़ लिया पीछे से और चूमने लगा दीवाल से मुझे सटके.

मैं – प्लीज़ स्लोली.

सलीम – स्लो हमे आता ही नही और बहुत इंतज़ार के बाद हाथ मे आई है ना तू तो ऐसा ही होगा.

उसने मुझे उठाके बेड पे डाल दिया और वो मेरे पास मे आके अपना कुर्ता और पयज़ामा निकाल दिया. बहुत ही गाटीली बॉडी थी उसकी. उसने मेरे बूब्स दबाए और फिर मेरा टॉप निकाल दिया.

मेरे बूब्स मेरी कमज़ोरी है उसको दबाने से मैं गरम हो गयी थी. फिर उसने मेरे पूरे जिस्म को आगे और पीछे से चूमा और मेरी ब्रा खोल दी और मुझे सीधा करके मेरे बूब्स को खूब चूसा और दबाया.

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फिर उसने अपना अंडरवेयर उतारा और बेड के नीचे खड़ा रह गया, मैं तो देखती ही रह गयी पहली बार मैने इतना लंबा लंड देखा था.

सलीम – क्या देख रही है तेरे बी.एफ का इससे आधा भी नही होगा, चल अब चूस इसे.

मैं उसके नज़दीक जाके बेड पे बैठ गयी और उसका मूह मे लेके सक करने लगी. मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और उसे भी मेरी सर्विस काफ़ी पसंद आ रही थी.

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मैं भी अब इस सबको एंजाय करने लगी थी और बहुत चूसने के बाद उसने मूज़े बेड पर लेटाया.

उसने अपना लंड का टॉप मेरी चूत के मूह पर रखा और कहा – क्या करू?

मैं – कम ऑन.

सलीम – क्या कम ऑन?

मैं – कम ऑन फक मी प्लीज़ डालडो अंदर.

वो स्माइल करते हुए थोड़ा सा अंदर डाला और उसकी थिकनेस भी ज़्यादा थी तो मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था.

मैं – आहह उहह.
वो एक कुत्ते समान स्माइल दे रहा था..

मैं – ऊहह आअहह आहह.

उसका लंड इतना बड़ा था की मैं दर्द से चिल्लाने लगी लेकिन मज़ा भी आ राहा था.
मैं – आअहह उहह य्ाआ याअ फक मी येस ..य्याअ फक मी.
15 मीं की चुदाई के बाद , उसने मुझे डॉगी स्टाइल मे चोदा ये मेरा फेवरेट स्टाइल है उसने पीछे से जम कर झटके मारना शुरू कर दिया.

ओह क्या मज़ा मिल रहा था, वो पीछे से मुझे चोदे जा रहा था और कभी कभी मेरे बूब्स को पकड़के हार्ड स्ट्रोक लगा रहा था.

ले साली और ले बहुत खूबसूरत है ना तू आज आ गयी ना मेरे नीचे. ले साली और ले और वो ज़ोर से मेरी गांड पे थप्पड़ मारे जा रहा था, दर्द भी बहुत होता था, पर सेक्स के मज़े मे वो पता नही अच्छा लग रहा था.
उसके बाद उसने मुझे हर पोज़िशन मे चोदा. उसने मुझे उठाया और लंड मे फॅसा कर उछाल उछाल कर चोदा. मेरी आज तक कभी भी ऐसी चुदाई नही हुई थि. फिर उसने मुझे बिठाया और अपना पूरा माल मेरे मूह मे डाल दिया, थोड़ा सा बाहर भी गिरा मेरी बॉडी पे.

मैने उसको एक कपड़े से सॉफ किया, क्योकि बाथरूम बाहर था हॉल मे और ये बेडरूम के डोर के सामने पर वाहा ऐसे केसे जाती, तो कपड़े से सॉफ किए.

कपड़े पहनने गयी, तो उसने मेरी ब्रा ले ली और कहा “आज ऐसे ही विदाउट ब्रा ही जाना है, ये मेरे लंड की तुम्हारी चूत पे जीत की निशानी है.”

मैने कपड़े पहने और बाहर वो लोग थे तो जाने मे काफ़ी एम्बररसे फिल हो रहा था. फिर भी जाना तो था, तो मैं बाहर निकली और मैं जाने लगी.

तो एक बोला “बहुत आवाज़े कर रही थी, लगता है सलीम ने खूब ठोका तुझे और तूने भी बड़े मज़े लिए आज तो.”

मैने उसको इग्नोर करके तुरंत ही हॉस्टिल चली आई.

उसके बाद मेरे दिमाग़ से वो जा ही नही रहा था. मूज़े काफ़ी मन कर रहा था, तो तीन दिन बाद अपने बी.एफ के पास गयी और सेक्स किया, पर मुझे वैसा मज़ा ही ना आया.

मैं अब हार्डकोर सेक्स को ही पसंद करने लगी थी. मैं मन ही मन आशा करती थी की सलीम का कॉल आए और फिर बुलाए. पर एक वीक तक उसका कॉल ही नही आया, तो मुजसे रहा नही गया, मैने उसे सामने से कॉल किया.

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मैं – हाइ सलीम.

सलीम – हाइ, कॉल क्यू किया?

मैं – आज 5:30 बजे मैं तुम्हारे फ्लॅट पे आ रही हू.

सलीम – क्यू फिर से चुदवाने का मन कर रहा है क्या?

मैं – नही ऐसे ही.

सलीम – हाहाहा, ठीक है ऐसे ही आजा पर हा इस बार मैं तेरी गांड मारूँगा.

मैं – नही प्लीज़.

सलीम – तुम्हारी मर्ज़ी आना है तो आओ, पर आओगी तो पीछे से ठोकुंगा तुझे ये भी फाइनल है.

और कॉल काट दिया.

मुझे तो जाना ही था, अब मैं अपने आप को रोक नही पा रही थी.

मैं शाम को वाहा पहुच गयी. मैं तुरंत अंदर चली गयी और उस दिन भी उसने काफ़ी चोदा मुझे और मेरी गांड भी खूब मारी.

वो पहली बार मैने एक्सपीरियेन्स किया था, पर थोड़ी देर के बाद बड़ा मज़ा आया. मैं जब जा रही थी तो उसके एक दोस्त ने कॉमेंट दिया “आज कुछ चाल बदल ही गयी है, लगता है सलीम ने पीछे से बहुत लिया है.”

मैं उसके सामने देखे बिना स्माइल करती हुई चली गयी.

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ऐसा अब वीक मे दो बार तो होने लगा, मैं वाहा जाने लगी और उसके दोनो रूममेट मलिक और अफ़ज़ल भी मेरे फ्रेंड्स बन गये.

एक बार मैं सॅटर्डे नाइट को पूरी रात वाहा गयी, क्योकि दूसरे दिन कॉलेज बंद होता है, रात को 9 बजे के बाद हॉस्टिल से बाहर आना या अंदर जाना बंद हो जाता है.

उस रात सलीम ने मेरी खूब चुदाई की और रात के 12 बजे नाश्ता करना था, तो मैं कपड़े पहन रही थी.

सलीम ने कहा – टॉवेल से ढक लो यहा सबको पता है की तू यहा चुदवाने आती है, तो फिर शरम किस बात की थोड़ा सा दर्शन का मज़ा वो भी तो करे तेरी जवानी का.

मेने टॉवेल को बॉडी पे लपेट लिया और उन्होने नाश्ता निकाला और मैने किचन मे चाय बनाई.

वो तीनो मुझे देख रहे थे. सलीम अंडरवेयर मे था. मैं हॉल मे गयी तो सलीम ने मुझे अपने गोद मे बिठा लिया.

मैं – ये क्या कर रहे हो?

सलीम – इन दोनो को पता ही है तू यहा क्यू आती है.

मलिक – अब बैठ भी जाओ उसने अंडरवेयर भी पहना हुआ है और तुमने टॉवेल.

अफ़ज़ल – यहा कुछ नया है तो वो तुम हो.

मैं – पहली बार नही देख रहे हो मुझे.

अफ़ज़ल – ऐसे तो पहली बार ही देख रहे है ना.

मैं स्माइल करते हुए चाय पीने लगी और सलीम चाय पीते पीते कभी कभी मेरे बूब्स दबा लेता, उपर से मैं उसकी और देखती पर वो तीनो स्माइल करने लगते.

और फिर नाश्ता करके वापस हम अंदर के रूम मे, ऐसे दो तीन सॅटर्डे चला.

एक दिन सॅटर्डे मलिक का बर्थडे था, तो मैं गयी तो हमने केक कट किया, फिर मैने कहा सॉरी पता नही था इसलिए गिफ्ट नही लाई वो पेंडिंग..

मलिक – वो मैं सामने से ले लूँगा डॉन’त वरी.

मैं – नाइस, और सलीम तुम को तो पता है फिर भी नही लाए.

सलीम – गिफ्ट उसका आ गयी है पर थोड़ी देर बाद देता हू.

फिर मैने कहा – चलो चाय के टाइम मिलते है, तब तक मैं थोड़ा फ्रेश हो जाती हू और मैं उनको आँख मार के रूम मे चली गयी.

सलीम ने अंदर आके खुद लेट के मुझे अपने उपर की पोज़िशन मे उपर बिठाया और मैने उसके उपर कूदना शुरू किया. मेरा मूह अंदर की तरफ था और मेरी बॅक डोर की ओर.

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तभी किसी ने मेरी बॅक पर हाथ रख के धक्का दिया और सलीम ने अपने दोनो हाथो से मुझे जक्कड़ लिया. उसका लंड मेरी चूत मे था और मेरे बूब्स उसकी चेस्ट मे डब गये थे और मैने पीछे मूड के देखा तो मलिक था और वो अपना लंड मेरी गांड मे घुसाने वाला था.

मैं – नही मैं प्लीज़ नही..

उसने धक्का दिया और दो तीन स्टोक्स मे अपना सारा लंड मेरी गांड मे डाल दिया और यहा सलीम का लंड ती ऑलरेडी मेरी चूत मे तूफान मचा रहा ही था.

मैं – ओह ह्म पल्ल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ निकलू आहह उफफफ्फ़.

मलिक – मैने कहा था ना की मैं गिफ्ट सामने से ले लूँगा.

सलीम – मैने भी कहा था उसका गिफ्ट आ गयी है, बाद मे देता हू लो मिल गया उसे गिफ्ट.

मलिक – साली कब से आवाज़े कर कर के तडपा रही थी, रंडी आज से तुझे हम सब चोदेन्गे और तू रंडी है इस रूम मे रहने वालो की..

और दोनो ने मुझे चोदना शुरू किया और मैं काफ़ी आवाज़े करने लगी.

मैं – आहह य्ाआआ छोड़ो ह्म याअ उफफफफ्फ़ हहााअ आअहह.

सलीम – आ गयी ना औकात पे आज तो तुझे पूरी रात ठोकेंगे हम सब.

तभी अफ़ज़ल आया और उसने अपना लंड मेरे मूह मे डाल दिया.

तीनो मेरे तीनो छेदो को चोद रहे थे और बाद मे बीच मे मुझे बिठाकर अपना पूरा माल मेरी बॉडी फेस बूब्स पे डाल के मुझे नहला दिया.

किसी ओरिजिनल रंडी की तरह लग रही थी. मैने आँख के आगे से माल हटाया और बाथरूम मे जाने लगी. तभी किसी दो ने मेरी गांड पे दोनो साइड जोरदार थप्पड़ मारा और मैं सिसकती हुई बाथरूम मे चली गई.

फ्रेश होके आई और चाय बनाई, पर अब रूल्स बदल गये थे. अब यहा हर एक मुझे चोद चुका था, तो अब सब न्यूड ही थे. नाश्ता करते करते भी मेरे बूब्स दबाते रहते थे.

ऐसा करीब 6 महीने तक हर सॅटर्डे फुल नाइट ये चलता रहा और वीक मे भी एक दो दिन दो घंटे जाती थी मैं जब फ्री होती थी, तब वाहा जो भी होता था वो चोदता था मुझे.

बाद मे उन सब की पढ़ाई ख़तम हो गयी तो वो चले गये, पर बाद मे भी तीन चार महीने मे एक बार तीनो आते थे स्पेशली मुझे चोदने के लिए.

जैसे ही इन लोगो की एंट्री हुई मेरा बी.एफ से ब्रेक अप हो गया, क्योकि मुझे मज़ा नही आता था. और इन 6 महीने के दौरान मेरी एंगेज्मेंट भी हो गयी थी.

पर फिर भी ये खेल चलता रहा और कभी कभी मैं उन तीनो के साथ नंगी बेड पे होती हू और मेरे होने वाले पति का कॉल आ जाता, तो वो लोग मुझे बात करने को कहते और फिर मस्ती करते करते मेरे बूब्स दबाते या लंड चुसवाते.

वो पूछता क्या कर रही हू? तो मैं कहती थी बेड पर हू और वो वाहा सेक्स टॉक करता कॉल पे और मुजसे कहता मैं अंदर डॉल रहा हू महसूस करो.

तो यहा रियल मे कोई अंदर डालता और मैं ओरिजिनल आवाज़ निकालती उसे लगता, मैं यूही कॉल पे मज़े दे रही हू, पर मैं रियल मे मज़े ले रही होती हू.

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